शायरी और कवितायें

" इन दुकानों में अब नहीं मिलते ,

जिन खिलोनों से दिल बहल जाये ,
इतना आदी अकेलेपन का हूँ ,
अपनी मौजूदगी भी खल जाये "


-------नोमान शौक़


तुम याद आई हो
  -  के एस एस कन्हैया 
जब भी निदाघ में उठी है हवा, तुम याद आई हो

श्वास में जब भरी कोई सुगंधि, तुम याद आई हो

यूँ तो मंदिरों मंदिरों न कभी घूमा किया अभागा

जब भी ये सर कहीं झुका, तुम याद आई हो

फूल दैवी उपवनों के भू पर खिले हैं घर-घर में

जब भी दिखा निश्छल कोई शिशु, तुम याद आई हो

संगीत-सी ललित कविता-सी कोमल अयि कामिनी

किसी लय पर जो थिरकी हवा, तुम याद आई हो

जो तुम वियुक्त तो हर धड़कन लिथड़ी रक्ताक्त अश्रु में

कभी औचक जो मुस्कराया, तुम याद आई हो


जलती आग सी सीने में, है धुआँ-धुआँ साँसों का राज

जब फैली कहीं भी उजास, तुम याद आई हो


मरुस्थली सा जीवन, वसंत मात्र स्वप्न है सुजीत का

जब भी कूकी कोई कोकिला, तुम याद आई हो


तुम्हारे साथ रहकर
तुम्हारे साथ रहकर

अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है

की दिशायें पास आ गयी हैं

हर रास्ता छोटा हो गया है

दुनिया सिमटकर

एक आँगन सी बन गयी है

जो खचाखच भरा है

कहीं भी एकांत नहीं

न बाहर, न भीतर



तुम्हारे साथ रहकर

अक्सर मुझे महसूस हुआ है

की हर बात का एक मतलब होता है

यहाँ तक की घास के हिलने का भी

हवा का खिड़की से आने का

और धूप का दीवार पर

चढ़कर चले जाने का



तुम्हारे साथ रहकर

अक्सर मुझे लगा है

के हम असमर्थताओं से नहीं

संभावनाओं से घिरे हैं

हर दीवार में द्वार बन सकता है

और हर द्वार से पूरा का पूरा

पहाड़ गुज़र सकता है।

कब सोचा था जीवन एक धोखा है

है उदासी सी मन में
खुश है सारा जहाँ
ठहर सा गया हूँ मैं
और चलता चला गया है कारवां।

मंजिले पास आती रही
मैं खुद से दूर होता गया
चाहा था जो वो मिलता गया
ख्वाहिशों का दम घुटता गया


इस शहर में मिला है काम बड़ा
मगर हुआ है छोटा नाम मेरा
हर काम की अपनी-अपनी तकलीफें
हर तकलीफों का अपना नाम

सोचा था जियेंगे हर पल का जीवन
कब सोचा था जीवन एक धोखा है
हम बिक गये खुशियों का सामान जुटाने में
खुशियाँ जा बैठी बेगानों के आंगन में


आज आ जा दुख मेरे मिल ले गले
बडा लम्बा तुझसे है नाता मेरा
जिन्दगी से तु मेरा समझौता करा दे
या साथ मेरे रहने को अपनी किस्मत बना ले.


-विनय जायसवाल


कोई साथ न दे मेरा
कोई साथ न दे मेरा , चलना मुझे भी आता है,

हर आग से वाकिफ हूँ , जलना मुझे भी आता है ,
 डूबती है नैया तो डूब जाने दो , मझधार और भंवर से निकालना मुझे भी आता है......

ख़ुशी क्या होती है, ये मुझे मालूम नहीं,
 इसीलिए ग़मों में भी मुस्कुराता हूँ ,
 साथ क्या होता है ये मुझे मालूम नहीं,
 इसलिए गिर कर फिर संभल जाता हूँ....

परखना मत, परखने से कोई अपना नहीं रहता ,
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता ,
डूब गए हो जिसका हर तिनका आसुओं में ,
ऐसे आशियाने में फिर कोई दूसरा नहीं रहता.....






मुश्किलहै अपना मेल प्रिये



मुश्किल है अपना मेल प्रिये, यह प्यार नहीं खेल प्रिये,

तुम एम.ए.फर्स्ट डिविजन हो, मैं हूँ मेट्रिक फ़ैल प्रिये,

यह प्यार नहीं खेल प्रिये......

तुम फौजी अफसर की बेटी, मैं टीचर का बेटा हूँ,

तुम रबडी खीर - मलाई हो, मैं तो हूँ सत्तू का सपरेटा हूँ,

तुम ए.क. घर मे रहती हो, मैं पेड़ के निचे लेटता हूँ,

तुम नई मारुती लगती हो, मैं स्कूटर लेम्ब्रेटा हूँ,

इस कदर अगर हम लुक-छुप कर,

आपस मैं प्यार बरायेंगे,

तो एक दिनेरे डैडी, दारा शिकोह बन जायेंगे I

हड्डी-पसली तोड़ मेरी, भिजवा देंगे जेल प्रिये,

यह प्यार नहीं खेल प्रिये......

तुम अरबी घोडी जैसी हो, मैं कुम्हार का गधा प्रिये,

तुम दीपावली कि बोनस हो, मैं करूं भूख हडताल प्रिये,

तुम मोती भरी तस्तरी हो, मैं प्लास्टिक का हूँ थाल प्रिये,

तुम वेजिटेबल बिरयानी हो, मैं कंकड़ वाली दाल प्रिये,

तुम हिरन चौकड़ी भरती हो,

मैं चलूं कछुए चाल प्रिये,

मैं पका पपीता लटका हूँ,मत मारो मुझे कुदाल प्रिये,

यह प्यार नहीं खेल प्रिये......

मैं शुक्र-शनी जेसा कुरूप, तुम कमल कि कोमल काया हो,

मैं तन-मन से हूँ कांशीराम,

तुम परम चंचला माया हो,

तुम गंगा-जमुना सी शीतल, मैं जलता हुआ पतंगा हूँ,

तुम शांतिधाम कि परम शांती, मैं तो धर्मो का दंगा हूँ,

तुम पूनम की चांदनी हो, मैं पथरीला अजन्ता हूँ,

तुम विधाता की वरदानी हो, मुझ में गलती ब्रह्मा की,

तुम जेट विमान की शोभा हो,

मैं बीएस में ठेलम-ठेल प्रिये,

यह प्यार नहीं खेल प्रिये......

तुम स्वदेसी मिक्सी हो,

मैं पत्थर का सिल बट्टा हूँ,

तुम ए.के. सैंतालिस राइफल , मैं एक देसी कट्टा हूँ,

तुम चतुर-चंचला देवी-सी, मैं भोला-भाला भालू हूँ,

तुम मुक्त शेरनी दुनियां में, मैं तो पिंजड़े का पालू हूँ,

तुम व्यस्त इंदिरा गांधी -सी,

मैं तो गुजरात सा खाली हूँ,

तेरी हंसी प्रियंका जिअसी है, मैं पुलिस वालों की गाली हूँ,

यदि जेल कभी हो जाए तो, भिजवा देना बेल प्रिये,

यह प्यार नहीं खेल प्रिये......

मैं ढाबे के ढाँचे जैसा, तुम सप्त सितारा होटल हो,

मैं महुए का देसी ठर्रा, तुम रेड लेबिल की बोतल हो,

तुम विश्व सुन्दरी एश्वर्य ,मैं धोती छाप जुगाड़ी हूँ,

यूं सत्ता की महारानी हो,मैं विपक्ष की लाचारी हूँ,

तुम ममता-जयललिता जैसी, मैं बैठा अटल बिहारी हूँ,

तुम तेंदुलकर की शतक प्रिये,

मैं फालोआन की पारी हूँ,

तुम मछली मानसरोवर की,

मैं सागर की सीपी घोंघा हूँ,

बीस मंजिल से गिर जाउंगा आगे मत मुझे ढकेल प्रिये,

यह प्यार नहीं खेल प्रिये......