Thursday, November 18, 2010

तेरी मीरा बनी फिरती हूँ


कुछ ऐसे छूया है तेरे प्यार ने
कि संभाले न संभालती हूँ
गली-गली, शहर-शहर
तेरी मीरा बनी फिरती हूँ

तलाश नहीं किसी जश्न की
बारिश कि ताल पर थिरकती हूँ
हर मौसम में हर मिजाज़ में
तेरी मीरा बनी फिरती हूँ

न पूछ मेरी दीवानगी का सबब
तू वो खुदा है जिसपर मरती हूँ
सोते-जागते, उठते-बैठते
तेरी मीरा बनी फिरती हूँ

तो क्या गर पायी न तुझे
तेरी याद में रोज़ संवरती हूँ
हँसती -खेलती, नाचती-गाती
तेरी मीरा बनी फिरती हूँ

तेरा साथ न मिल पाया तो क्या
तेरे हिज्र से गुज़र करती हूं
तेरे ख्यालों की चादर पहनकर
तेरी मीरा बनी फिरती हूं

फर्क मिट गए हैं मुझमें और तुझमें
ज़माने से अब न डरती हूं
गुजारिशों-तलब को पीछे छोड़
तेरी मीरा बनी फिरती हूं

एक शुभचिंतक द्वारा सुझाया हुआ:

जीवन सागर की गहराइयों

के भंवर में नित घिरती हूँ

प्रीत सीपों की तलाश में

तेरी मीरा बनी फिरिती हूँ...

Friday, November 12, 2010

my composure




The reason why i stay happy

the reason i don't complain

i'm hopeless beyond despair

i'm silenced beyond pain