Wednesday, March 13, 2013

तुम




मेरी साँसों में जो दहक है
उसमें तुम्हारी महक है

संगीत में जो धनक है
क्या वो तुम्हारी ही आवाज़ की खनक है


मेरी आसुओं में जो असर है
तुझसे दूरी का कसर है

मेरी चाल में जो रवानी है
तुम्हारी पल-पल की कहानी है

मेरी खुली आज़ाद हंसी
में हैं तेरी ख्वाहिशें बसीं

मैं जो भी जैसी भी बनी हूँ
तुम्हारी मिट्टी में ही सनी हूँ

और तुम कहते हो मैं तुम्हें याद नहीं करती?

जी जाओ


आह करे जब दिल
फिर से कलम उठाओ
दीर्घ सांस भरो
उस लम्हे को जी जाओ

याद आये सनम
उसे आँखों में समाओ
नाम रखो लबों पर
उस लम्हे को जी जाओ

दोस्त बने बेवफा
एक बार तो मनाओ
फिर नेकी का हौंसला रख
उस लम्हे को जी जाओ

खिसक रही हो ज़मीं जब
औरों के घर बनाओ
प्यार ही राह है, प्यार ही मंजिल
बस, प्यार से जीये जाओ