Wednesday, March 13, 2013

जी जाओ


आह करे जब दिल
फिर से कलम उठाओ
दीर्घ सांस भरो
उस लम्हे को जी जाओ

याद आये सनम
उसे आँखों में समाओ
नाम रखो लबों पर
उस लम्हे को जी जाओ

दोस्त बने बेवफा
एक बार तो मनाओ
फिर नेकी का हौंसला रख
उस लम्हे को जी जाओ

खिसक रही हो ज़मीं जब
औरों के घर बनाओ
प्यार ही राह है, प्यार ही मंजिल
बस, प्यार से जीये जाओ 

2 comments:

  1. splendidly written..
    a 'living in the moment' poem..
    an infinite no. of 'thumbs up' to this poem.. :)

    DISCLAIMER: I AM NO EXPERT!!! :D

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  2. like the positive thinking in the poem...........
    well done

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