Thursday, June 15, 2017

शिवी



मस्त पवन सी चाल चले वो

चुटिया पीछे झूली जाए

जाने कैसे वो हंसी खेल में

छू कर देती गम के साये

 

काम करे ऑफिस में जब वो

मोदी का भी सर झुक जाए

रसोई, कपडे, घर, इस्त्री में

रोज़ नए इतिहास बनाये

 

बात रही जहां आवभगत की

लोगों को पलकों पर बिठाये

खाली पेट आप चल दिए तो

पोटली बाँध कर घर पहुंचाए

 

Friend, philosopher, guide कभी,

कभी बकैती की पुल बनाये

dance करे मवाली वाली

Mimicry से सबका दिल लूट जाए

 

परी, घुंघराले बालों वाली

नानी दादी सी गुणों में समाये

चुलबुली, चटपटी, प्यारी, कोमल

तुमसे दिल-घर रौशन हो जाए

अब तुम बिन हमसे रहा जाए

अब तुम बिन हमसे रहा जाए…

3 comments:

  1. Such a nyc creation..so real and pure...impressed!!!

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  2. Thank you Satya, let's just say that the subject elicited this piece. She is the nice creation. Real and pure 😊

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