Monday, March 28, 2011

अबकी सावन फिर आया है


अबकी सावन फिर आया है, बताना उन्हें
दिखाना उन्हें,
वो सड़कें जो पत्तों से ढकी हुई हैं
वो टहनियाँ जो फूलों से लदी हुई हैं
वो सुबह-सुबह कोयल का गाना
वो भीनी सी खुशबू का हर पल आना
वो झरने की रिमझिम तरंग
वो दिल का उछलता पतंग
वो प्रेमी जोड़ियों का मुग्ध संग
वो प्रेम के धागों से जुड़े हुए अंग
वो दिन की ज़रा-ज़रा से धूप
वो धरा का खिला खिला रूप...

अबकी सावन फिर आया है, बतान उन्हें।

एक और गर्मी बीत गयी,
उनके पसीने की ठंडक को छूए बिना
एक और बरसात टल गयी,
उनके जिस्म को आप में घोले बिना
एक और पतझड़ चला गया,
उनके साथ एक लंबी सैर किए बिना
एक और सर्दी पार हुई,
उनके बाहों में सिकुड़कर सोए बिना...

अबकी सावन फिर आया है, बताना उन्हें
याद दिलाना उन्हें, कि मैं आज भी जीती हूँ
उनसे दूर बिताए लम्हों को, उँगलियों पर गिनती हूँ...

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