Saturday, May 8, 2010

तेरी याद

मैं तो मिट ही चली थी जब
सुर्ख लहू में जैसे आग समाई
मार के भी न मरने दिया तूने
हाय! तेरी याद फिर आई
हाय! तेरी याद फिर आई...

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