Wednesday, April 14, 2010

अब मैं क्या कहूं..

के जवाब ही न दे पाऊँ

मत पूछ सवाल ऐसे

दिल ज़र्रों में रोता है

बात बताऊँ भी तो कैसे..

1 comment:

  1. गली-गली तेरी याद बिछी है, प्यार रस्ता देख के चल
    मैं वही तेरा हमराही हूँ, साथ मेरे चलना है तो चल।

    याद है अब तक तुझसे बिछड़ने की वो अँधेरी शाम मुझे
    तू ख़ामोश खड़ा था लेकिन बातें करता था काजल।

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